रविवार, फ़रवरी 18, 2007

बोलो कैसे जिना है - मंगेश पाडगावकर

बोलगाणी ईस काव्य ग्रन्थ में मंगेश पाडगावकर जी ने मराठी में सरल भाषा में अनेको प्यारी कविताओं को लिखा है। सांगा कसं जगायचं ये उनमें से ही एक कविता है। ईस कविता को आप यहाँ सुन सकतें है। अवश्य सुने।
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बोलो कैसे जीना है
रोते रोते
या गुनगुनाकर
आप बताओ

आँखों ही आँखों में आपकी
कोई बाट
जोहता है ना?
गरमा गरम खाना
कोई सलीके से
परोसता है ना?

जली कटी कहना है?
या दुआ देकर हसना है?
आप बताओ

बोलो कैसे जीना है
रोते रोते
या गुनगुनाकर
आप बताओ

भीषण अंधेरी
रात में जब
कुछ दिखाई नही देता है
आपके लिये
दीप लेकर
कोई जरूर खड़ा होता है

अंधेरे में चिढ़ना है?
या प्रकाश में उड़ना है?
आप बताओ

बोलो कैसे जीना है
रोते रोते
या गुनगुनाकर
आप बताओ

पाँव में काँटा
चूभता है
हा ये सच होता है
सुगंधित फूल
का खिलना
क्या सच नही होता है?

काँटों की तरह चूभना
या फुलों की तरह महकना?
आप बताओ

बोलो कैसे जीना है
रोते रोते
या गुनगुनाकर
आप बताओ


प्याला आधा
खाली है
ये भी कह सकते हो
प्याला आधा
भरा हुआ है
ये भी तो कह सकते हो

खाली है कहना है?
या भरा हुआ कहना है?
आप बताओ

बोलो कैसे जीना है
रोते रोते
या गुनगुनाकर
आप बताओ
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कवि- मंगेश पाडगावकर
काव्य संग्रह - बोलगाणी
मूल कविता - सांगा कसं जगायचं, कण्हत कण्हत की गाणं म्हणत, तुम्हीच ठरवा

भावानुवाद - तुषार जोशी, नागपुर

2 टिप्पणियाँ:

miredmirage ने कहा…

तुषार जी, बहुत अच्छा लगा पढ़कर। यदि मूल रचना भी साथ में देते तो और भी अच्छा लगता । थोड़ी मराठी आती है । अनुवाद के साथ पढ़ने में आनन्द आता ।
घुघूती बासूती
ghughutibasuti.blogspot.com
miredmiragemusings.blogspot.com/
पुनश्च .. क्षमा कीजिये , यदि जिना को जीना बना दें तो ठीक रहेगा ।
घुघूती बासूती

Tushar Joshi ने कहा…

बासूती जी,
मैने जिना को जीना कर दिया है। मूल कविता की कडी मैने कविता के निचे लगाई है कृपया उसे देखें।
धन्यवाद।
तुषार जोशी, नागपुर